चकाई प्रखंड का बेलखड़ी गांव आज यानी बुधवार को बारह बजे बदलाव की जीवंत मिसाल बन चुका है। जहां कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, अब वहां बच्चों की पढ़ाई की आवाज सुनाई देती है। यह वही गांव है जो कभी भय और अंधेरे का प्रतीक माना जाता था। लोग रात के समय घर से बाहर निकलने से डरते थे। गांव में सड़क, बिजली और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। किसी बीमार व्यक्ति क