"इतिहास के पन्नों में दर्ज वो शहादत, जिसे सुनकर आज भी रूह कांप जाती है और सीना फख्र से चौड़ा हो जाता है! पन्ना के ऐतिहासिक गुरुद्वारे में आज दिन शुक्रवार दिनांक 26 दिसम्बर को उस अदम्य साहस को नमन किया गया, जिसने मुगलिया सल्तनत की क्रूरता के आगे झुकने से बेहतर मौत को गले लगाना समझा।