धालभूमगढ़ स्थित नरसिंहगढ़ स्थित अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को दोपहर 3 बजे कथावाचक परम पूज्य विजय गुरुजी महाराज ने शुकदेव जी एवं राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भागवत कथा को वेद रूपी कल्पतरु का फल बताते हुए कहा कि कथा श्रवण से मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन को सही दिशा मिलती है।