बुधवार की शाम करीब पांच बजे से लेकर देर शाम तक प्रतिमा विसर्जन के साथ ही सरस्वती पूजा का समापन हो गया। पूजा समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने गाजे बाजे के साथ प्रतिमा का विसर्जन बूढ़ी गण्डक नदी के विभिन्न घाटों पर किया। प्रतिमा विसर्जन के दौरान युवाओं की टोली बाजे के गीतों पर डांस करती नजर आई।