मंसूरचक प्रखंड में करीब दो सौ वर्षों से चली आ रही मूर्तिकारों की पारंपरिक कला आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है मूर्तिकार रेखा देवी बताती हैं कि उनके पूर्वजों ने मिट्टी के घरेलू सामान के अलावा मूर्तियां, खिलौने और मुखौटे बनाना शुरू किया था एक समय था जब यहां निर्मित मूर्तियों की भारी मांग थी और दूर-दूर से व्यापारी इन्हें खरीदने आते थे।