बता दे कि भगवान श्रीराम जब 14 वर्ष के लिए अध्योया से वनवास पर निकले थे। तब छत्तीसगढ़ के राजिम से होते हुए महानदी किनारे डोंगापथरा, रूद्री और सिहावा पर्वत तक पहुंचे थे। अब यह तीनों स्थान रूद्रेश्वर धाम, डोंगेश्वर धाम, कर्णेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। हर साल इन जगहों पर माघ पूर्णिमा का भव्य मेला लगता है। यहां 1 फरवरी रविवार को मेले का आयोजन किया गया है।