मजहब से पहले इंसानियत” की कहावत को देवबंद में उस समय साकार होते देखा गया, जब एक मुस्लिम युवक ने अपने हिंदू पड़ोसी के निधन के बाद पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। इस मानवीय पहल ने न केवल स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल भी पेश की।