रामायण की सीता की तरह अपनी शुद्धता, पतिव्रत धर्म और लोक-मर्यादा की दुहाई देती 21 वर्षीय गीतांजलि की आंखों में आंसू हैं, लेकिन आवाज में अडिग जिद और टूटे आत्मसम्मान की पीड़ा साफ झलकती है। समाज, रिश्तों और भरोसे के बीच खुद को अकेला महसूस कर रही गीतांजलि ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए जो कहा, वह किसी एक लड़की की नहीं, बल्कि उन तमाम महिलाओं की वेदना है, जो अपने