दीपावली पर धनलक्ष्मी की कृपा पाने के लिए मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा आज भी कायम है। कुम्हार की दीपावली और गर्मी के मौसम में ही कुछ आमदनी हो पाती है। कुम्हारों का बुधवार शाम 5:00 बजे कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक चाक भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिसके कारण उन्हें बर्तन बनाने में काफी आसानी हो रही है और उनके उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हुई है।