ये कोई विश्वविद्यालय अध्यक्ष का काफिला नहीं है, बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का काफिला है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। कोई गाड़ी का दरवाजा खोलकर खड़ा है, कोई सनरूफ से बाहर निकलकर खड़ा है, तो कोई खिड़की से बाहर लटक रहा है। सवाल ये है कि अगर यही हरकत आम जनता करती, तो कितने का चालान कटता? नियम सबके लिए बराबर हैं या फिर पद के हिसाब से बदल जाते हैं—ये सवाल खुद-ब-खुद खड़ा हो जाता है।