जनपद भर मे जुम्मा नमाज़ अदा की गई है।अधिकतर जगहों पर इस जुम्मा को रमजान मुबारक का अलविदा जुम्मा माना गया है लेकिन अलविदा जुम्मा पूरी तरीके से इसलिए नही कहा जा सकता क्योंकि चांद निकलने पर ही यह तय हो सकेगा।अंतर्राष्ट्रीय क़ुद्स दिवस समाज द्वारा अंतिम जुम्मा को मनाया जाता है जिसमे फिलिस्तीन के मजलूमो की हिमायत तथा इजरायल के अत्याचार जुल्म के विरोध करने से है।