सड़क निर्माण के नाम पर जनता की ज़िंदगी को नरक बनाया जा रहा है। जहां एक ओर जगह-जगह सड़क खुदी पड़ी है, वहीं दूसरी ओर पानी का छिड़काव पूरी तरह नदारद है। नतीजा—सड़क नहीं, धूल की ऐसी छुरी बन चुकी है जो हर गुजरते नागरिक के गले में अटक रही है। दिनभर उड़ती धूल से राहगीरों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। बच्चे, बुज़ुर्ग और मरीज सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, लेकिन शासन-प