सोमवार की सांझ गोला क्षेत्र के नदी, तालाब और घाटों पर छठ पर्व की आस्था चरम पर रही। व्रती महिलाएं नदियों में खड़ी होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए उत्सुक दिखीं। वातावरण में गूंजते भोजपुरी भजन “केलवा के पात पर उगेलन सुरुज..." और "कांच ही बांस के बहंगिया..." ने श्रद्धा और भक्ति का रंग घोल दिया।