ग्रामीण बताते हैं कि इस नियमित आयोजन से आपसी भाईचारा बढ़ा है और सनातन संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिल रही है। बिना किसी राजनीतिक या सामाजिक मतभेद के, पूरा गांव एक साथ बैठकर भक्ति भावना में लीन होता है। घिवरा गांव की यह पहल आज आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।