स्थानीय नजनप्रतिनिधियों ने विभिन्न चौराहों और झुग्गी-झोपड़ियों का दौरा कर जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरित किए। कई निजी संस्थाओं द्वारा जगह-जगह अलाव की व्यवस्था की गई है। समाजसेवी समूहों ने "कोई भूखा न सोए और कोई ठंड से न ठिठुरे" के संकल्प के साथ देर रात सड़कों के किनारे सो रहे असहाय लोगों को गर्म कंबल और ऊनी कपड़े भेंट किए।