टाटीझरिया: होलंग की दीवारों पर जीवंत हुई पुरखों की विरासत, ग्रामीण 'सोहराय' को सहेज रहे, लोक कला को मिल रहा नया जीवन
होलंग की दीवारों पर जीवंत हो उठी पुरखों की विरासत, 'सोहराय' को सहेज रहे ग्रामीण। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच फीकी पडती लोक कला को मिल रहा नया जीवन। झारखंड की माटी की सोंधी खुशबू और आदिम संस्कृति की जीवंत पहचान 'सोहराय' कला अब केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहेगी। टाटीझरिया प्रखंड के होलंग गांव के ग्रामीणों ने इस विलुप्त होती विरासत को सहेजने का संकल्प लिया है।