उन्होंने कहा कि जमीनों के लिए उचित रेट का मुआवजे का हवाला देकर किसानों को हस्ताक्षर करवाए गए तथा उन किसानों ने जमीन के रेट को लेकर बाद में आपत्तियां भी डाली। इनको पूर्ण रूप से नजरअंदाज किया गया। जिसके बाद कुछ किसानों ने कोर्ट का सहारा लिया। वहीं किसानों को समिति से बाहर रखा।