आधुनिकता के इस दौर में जहां मनोरंजन मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गया है, वहीं छोटे आरापुर के 60 वर्षीय चमरा बघेल अपनी अनोखी 'पुतली कला' से लोक संस्कृति की लौ जलाए हुए हैं। वे न केवल पुतलियों को नचाते हैं, बल्कि अपनी खुशमिजाजी से लोगों के दिलों में भी जगह बनाते हैं।चमरा राम की कला प्रदर्शन का तरीका बेहद खास है। वे पुतली को बांस पर बांधकर बड़ी ही कुशलता से नचाते हैं।