कभी यही भेलवा नदी… हमारी पहचान थी। यहीं हमारी माँएँ बर्तन धोती थीं… हम इसी पानी को घर ले जाकर पीते थे… बच्चे नहाते थे… छठ पूजा मनते थे… ये नदी जीवन थी… आशीर्वाद थी… और आज देखिए… प्लास्टिक के पहाड़! पॉलिथीन की चादर! जब नदी में कचरा सड़ता है… जब प्लास्टिक के नीचे गंदा पानी जमा होता है… जब मरे हुए जानवर कई दिनों तक पड़े रहते हैं… तो सिर्फ बदबू नहीं आती… उस सड़न से जहरीली गैसें निकलती हैं। वो दुर्गंध हवा में घुल जाती है। हवा के साथ उड़कर आसपास के घरों तक पहुँचती है। नालियों का जहरीला काला पानी! मरे हुए जानवर तैरते हुए! दुर्गंध ऐसी कि सांस लेना मुश्किल! ये नदी नहीं… ये बीमारी का अड्डा बन चुकी है! डेंगू! मलेरिया! टायफाइड! हमारे बच्चे बुखार से तप रहे हैं… हमारे बुजुर्ग अस्पताल की लाइन में खड़े हैं… लेकिन अब बदलाव होगा! अब सिर्फ शिकायत नहीं — समाधान होगा! जब अनिता देवी एयर कंडीशन छाप — नंबर वन — आएंगी… तो सिर्फ वादा नहीं, काम होगा! ✔️ नदी की विशेष सफाई अभियान ✔️ कचरा प्रबंधन की सख्त व्यवस्था ✔️ नालियों का सही डायवर्जन ✔️ नदी किनारे डस्टबिन और निगरानी ✔️ बीमारी रोकथाम अभियान भेलवा फिर से बहेगी… साफ, स्वच्छ और गर्व के साथ! अब विश्रामपुर झुकेगा नहीं! अब बीमारी जीतेगी नहीं! अब गंदगी बचेगी नहीं! भेलवा फिर से चमकेगी — और विश्रामपुर फिर से दमकेगा! हाथ उठाइए और कहिए — 👉 “एयर कंडीशन छाप – नंबर वन!” 👉 “स्वच्छ भेलवा – स्वस्थ विश्रामपुर!” 👉 “बदलाव तय है!”