ईस जल क्रांति को भारत अब और नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता
लेखक : सीए अनिल के. जैन
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जल संकट अब कोई दूर की चेतावनी नहीं रहा—यह वर्तमान और बढ़ता हुआ संकट है। तीव्र जनसंख्या वृद्धि, अनियमित मानसून और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव मीठे जल संसाधनों पर अभूतपूर्व दबाव डाल रहे हैं। विश्व भर में गिरता भूजल स्तर कृषि, उद्योग और पेयजल आपूर्ति के लिए खतरा बनता जा रहा है। जो समस्या कभी मौसमी मानी जाती थी, वह अब पूरे वर्ष की चुनौती बन चुकी है। फिर भी एक व्यावहारिक, सिद्ध और व्यापक स्तर पर लागू किया जाने वाला समाधान पहले से उपलब्ध है: "अतिरिक्त नदी जल को रिचार्ज कुओं के माध्यम से भूमिगत भंडारित करना"।