संस्कारों की पहली पाठशाला परिवार होता है, यहीं से राष्ट्रभक्ति का बीज अंकुरित होता है। भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए स्वदेशी को अपनाना आवश्यक है, जिससे स्थानीय उद्योग और श्रमिक सशक्त हो सकें। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह संघचालक डॉ. राजेश सेठी ने व्यक्त किए।