खालवा विकासखण्ड के ग्राम ढाकना निवासी माना और उनकी पत्नी ममता अपने 13 माह के बच्चे शरद के कम वजन और कुपोषण को लेकर चिंतित रहते थे। एक दिन गांव की आशा कार्यकर्ता सावित्री पाटिल ने शरद के माता पिता को सलाह दी कि शरद को पोषण पुनर्वास केन्द्र खालवा में भर्ती करवा दें, तो वहां की बेहतर देखभाल, अच्छी खुराक और पोषण विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से शरद स्वस्थ हो सकता है।