काली माता मंदिर के सामने की बेस कीमती भूमि तत्कालीन नगर परिषद अध्यक्ष ने अतिक्रमण से मुक्त कराई थी। लगभग 12 साल बाद फिर से कुछ भू माफिआओं की नजर इस भूमि पर पड़ गई है। ग्राउंड पर अतिक्रमण की जानकारी मिलने पर पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष और भाजपा नेताओं ने खोला मोर्चा।