गिद्दी ए में माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव के अलौकिक स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे पूरा क्षेत्र संपूर्ण रूप से शिवमय हो उठा। वृन्दावन से पधारे पूज्य कुंज बिहारी जी महाराज ने अपनी साधना से वातावरण में गूंजती वैदिक मंत्रध्वनियाँ, धूप-दीप की सुगंध और “हर-हर महादेव” के जयघोष से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं कैलाश पर्वत की छाया यहां उतर आई हो।