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अनिल कुमार प्रजापति

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यूजीसी अधिनियम 2026 के समर्थन में सस्ती व समान शिक्षा के उद्देश्य से एडीवी इन्वेंशन एकेडमी पुतसर संतकबीरनगर के पक्ष में डोर टू डोर जनसंपर्क करते हुए छात्रों का उत्साही समूह।
दबंग माफियाओं अत्याचारियों एवं शोषण करने वाले सत्ता संरक्षण प्राप्त धनबली प्रभावशालियों के खिलाफ असमानता एवं भेदभाव को देखते हुए यूजीसी का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखने लगा है।अतः एडीवी इन्वेंशन एकेडमी पुतसर संतकबीरनगर का सपोर्ट करे
क्षेत्रीय छात्रों के व्यापक समर्थन से सस्ती व समान शिक्षा के अनुयायियों के हौसले बुलंद हैं। अतः आशा है कि अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान द्वारा संचालित एडीवी इन्वेंशन एकेडमी पुतसर संतकबीरनगर पहले ही सत्र में टाप शुरुआत करेगी।
शिक्षा जगत में मची लूट खसोट के खिलाफ एकजुट होकर छात्रों ने एडीवी इन्वेंशन एकेडमी पुतसर संतकबीरनगर के पहले सत्र का शुरू किया व्यापक प्रचार-प्रसार।
मैं कोई वीआईपी नहीं बल्कि आम ग्रामीण हूं किन्तु जनहित में मुखरता के चलते धन्नासेठों सहित अत्याचारियों के निशाने पर रहता हूं फिर भी अपनो का साथ नहीं मिलता।
जिस दिन वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वर्ग पार्टीगत दलालों का बहिष्कार करते हुए अपने संवैधानिक हक अधिकार और सामाजिक न्याय के लिए एकजुट संघर्ष पर उतारू हो जाएगा उस दिन कायाकल्प होने से कोई रोक नहीं सकता अन्यथा का परिणाम सामने है।
शिल्पकार मझवार तुरैहा तरमाली आरक्षण को लेकर 17 अतिपिछड़ी जातियों का पार्टीगत सौदागरों के बहकावे में आकर अलग अलग संघर्ष करना ही हमारे विफलता का प्रमुख कारण है। जाति जाति की गुटबाजी से उपर उठकर जिस दिन वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वर्ग एकजुट।
जनहित में मुखरता के चलते यूपीएससी की तैयारी कर रहे बच्चों का कैरियर बर्बाद करने एवं हमारे हत्या की गहरी साजिश रची जा रही है जिसे आम आवाम समेत शासन प्रशासन व सरकार को गंभीरता पूर्वक संज्ञान लेना चाहिए।
राज्य स्तरीय अपील में पहुंचा 17 अतिपिछड़ी जातियों का मुख्य आधार शिल्पकार आरक्षण का मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में शासन प्रशासन और सरकार के लिए सरदर्द बनना निश्चित है।
कैसे नहीं मिलेगा आरक्षण और कौन खा लेगा हमारा हक हिस्सा अधिकार लेकिन उसके लिए सभी 17 अतिपिछड़ी जातियों को एकजुट और सचेत होना पड़ेगा और इस आवाज को शासन प्रशासन और सरकार तक पहुंचाना पड़ेगा,न कि अलग-अलग गुटों में बंटकर हंसी का पात्र बनना है।
शासन प्रशासन और सरकार हमारे ज्ञापनों पर जनसमस्याओं के न्यायसंगत निस्तारण को लेकर कितना अमल करती है यह तो उनका बिषय है किन्तु संगठन द्वारा आरक्षण बेरोजगारी और समाज में व्याप्त भय भूख भ्रष्टाचार आदि को देखते हुए जनांदोलन की चेतावनी दी गई है।
जिलाधिकारी संतकबीरनगर का आर्डर ठंडे बस्ते में क्यों चला गया और किसके इशारे पर आरक्षण का मुद्दा फंसाया जा रहा है जो अभी तक कुम्हर गड्ढों के पट्टे, बड़े पैमाने पर रोजगार परक हब स्थापित करने की जमीन तथा शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत अनुसुचित जाति
माटीकला बोर्ड कुम्हारों को गुमराह कर वोट लेने का महज एक लालीपाप है। अतः आजका युवा मिट्टी से उपर उठकर विज्ञान एवं संविधान को तरजीह देते हुए सामाजिक न्याय के लिए एकजुट संघर्ष पर उतारू नहीं हुआ तो पुर्वजों की भांति मानसिक गुलाम बनकर मरना तय है
संख्यात्मक आरक्षण/हिस्सेदारी के साथ साथ निचले पायदान को आर्थिक एवं शैक्षणिक मजबूती प्रदान करना अनिवार्य है।
उत्तर प्रदेश में वंचित अतिपिछड़ा आरक्षण का मुद्दा अंदर से इतना सुलगने लगा है कि जिस दिन कुछ सक्षम और सामर्थ्यवान लोग आर्थिक बैंकिंग के लिए साथ खड़े हो गए फिर यैसे बृहद जनांदोलन का रुप लेगा  जिससे सरकार की बुनियाद उखड़ जाएगी।
चला कांरवा नहीं रुकेगा भय भूख भ्रष्टाचारो से और जर्रा जर्रा गूंज उठेगा आरक्षण के नारों से।
पुर्व चौकी प्रभारी काली जगदीशपुर के सामने बेचन प्रजापति के परिजनों पर गोलबंद हमला करने वाले ये वही दहशतगर्द आरोपी है जिनपर हमारे द्वारा पारिवारिक सुरक्षा को लेकर कार्यवाही की मांग की जा रही है जिनके खौफ के चलते कोई गवाही नहीं देता।
जनहित में आवाज उठाने का मतलब यदि समाज ताकत से साथ नहीं खड़ा हुआ तो हमारी हत्या तक हो सकती है परिजनों के साथ जैसा आतंक मौके पर देखने को मिल रहा है।
अनावश्यक शोशल मिडिया पर हूं हल्ला मचाने वालो तुम्हे कोई महत्व क्यों देगा जरा विचार करो।
संख्यात्मक आरक्षण एवं हिस्सेदारी आदि से दूर क्यों है कुम्हार समेत वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित भूमिहीन मजदुरा वर्ग।
क्या कुम्हारों का वजूद मिटाना चाहती हैं शासन प्रशासन और सरकार,यदि कुम्हार शिल्पकार नहीं है तो है कौन, आरटीआई का जबाब क्यों नहीं दे रहे हैं बस्ती मंडल के जिम्मेदार।
प्रजापति समाज समेत वंचित अतिपिछड़ा भूमिहीन मजदूरा वर्ग हर मोर्चे पर फेल क्यों आइए शार्ट-कट में जानते हैं।
जब तक गरीब कमजोर आम जनमानस अंतःकरण से प्रकाशित व प्रफुल्लित नहीं होता है तब तक देश में दीपावली का सही मायने स्थापित होने वाला नहीं। अतः व्यवस्था परिवर्तन के लिए सर पर कफ़न बांधकर एकजुट लड़ाई लड़ना होगा अन्यथा का परिणाम सामने है।
शिक्षा माफियाओं को आइना दिखाने के लिए अभय प्रजापति के नेतृत्व में सस्ती एवं समान शिक्षा का बिगुल फूंकने वाले इन बच्चों का अहम योगदान होगा जिसके चलते ग्राम पुतसर थाना महुली जनपद संतकबीरनगर उत्तर प्रदेश में खुलने जा रहे इस विद्यालय को इतिहास
गरीब कमजोरों के लिए क्या दिवाली क्या होली जब समाज में व्याप्त भय भूख और भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। देश और प्रदेश के वास्तविक कर्णधार आइएएस, पीसीएस और आइपीएस होते हैं।