सामाजिक सोच को झकझोरते हुए परिवारजनों ने एक ऐतिहासिक पहल की।उन्होंने अपनी बेटियों परमेश्वरी व मनीषा की बिंदोरी घोड़ी पर बैठाकर निकाली तथा ठीक वैसे ही जैसे आमतौर पर बेटों की निकाली जाती है।डीजे की धुनों पर परिवार व रिश्तेदारों ने झूमकर नाचते हुए इस पल को यादगार बना दिया।भाई सोमबीर आजाद व मुकेश बेरवाल ने कहा लडक़ा एक घर को संवारता है, लड़की दो घरों को सवारती है।