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*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 8 दशक पुरानी किशाऊ परियोजना को मिली निर्णायक गति*

*केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों का ऐतिहासिक MoU*

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित इस परियोजना के लिए हुआ यह समझौता जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल तथा यमुना के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं निर्णायक कदम है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज का दिन केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर का अवसर नहीं, बल्कि लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में बढ़ाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड की ओर से भारत सरकार सहित सभी सहभागी राज्य सरकारों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इतने लंबे समय में परियोजना को आगे बढ़ाने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में दशकों से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में 16 जून 2026 की बैठक में किशाऊ परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद केंद्र एवं सहभागी राज्य सरकारों के बीच निरंतर समन्वय से परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई और आज MoU पर हस्ताक्षर के साथ इसे औपचारिक रूप दिया गया है।

*राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना*

मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ कोई सामान्य बांध परियोजना नहीं है, बल्कि यह जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना है।

उन्होंने कहा कि परियोजना से लगभग 1562 MCM क्षमता का विशाल जलाशय बनेगा तथा 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होगी। इसका लाभ उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित पूरे अपर यमुना बेसिन को मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना केवल एक राज्य या क्षेत्र की परियोजना नहीं है, बल्कि यह अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण है। केंद्र और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों तथा सहभागी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से दशकों से लंबित परियोजना को अब निर्णायक गति मिली है।

*प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता*

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के निर्माण में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी सामने आएंगी। परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील एवं सम्मानजनक पुनर्वास उत्तराखण्ड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है और राज्य सरकार इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी।

*क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि उपलब्ध कराना चुनौती*

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए लगभग 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। इसके कारण क्षतिपूरक वनीकरण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे वनाच्छादित और पर्वतीय राज्य के लिए इतनी बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसलिए उन्होंने भारत सरकार तथा सभी सहभागी राज्यों से अनुरोध किया कि क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में उत्तराखण्ड को सहयोग प्रदान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय एवं वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

*‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन*

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में सभी सहभागी राज्य किशाऊ परियोजना को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने में सफल होंगे।

उन्होंने कहा कि आज हुआ MoU हस्ताक्षर केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि ऐसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत का ऐतिहासिक पड़ाव है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना के क्रियान्वित होने से जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवीकरण को नई गति मिलेगी तथा अपर यमुना बेसिन के राज्यों के विकास को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा केंद्रीय मंत्रिगणों, सहभागी राज्य सरकारों एवं उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
उत्तराखंड की चुनौतियों के समाधान खोजेंगे युवा, 90 दिन चलेगा इनोवेशन हैकाथॉन

ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने किया

देहरादून, 15 सितंबर : उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों के तकनीकी समाधान तलाशने के उद्देश्य से मंगलवार को उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन-2026 का शुभारंभ हुआ। 90 दिनों तक चलने वाली इस पहल में युवाओं की तकनीकी प्रतिभा और नए विचारों को वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने किया। इस मौके पर करीब 500 छात्र-छात्राएं, शिक्षाविद, शिक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ और युवा इनोवेटर्स मौजूद रहे।

हैकाथॉन में आपदा प्रबंधन, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और सुशासन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान तलाशे जाएंगे। प्रतिभागियों को उत्तराखंड की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में राज्य की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने छात्रों से तकनीक को केवल नवाचार के प्रयोग तक सीमित न रखते हुए नागरिकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस और ड्रोन तकनीक का उपयोग शासन और जनसेवा को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। विकसित किए जाने वाले समाधान व्यावहारिक, जिम्मेदार और प्रयोगशाला से धरातल तक पहुंचने में सक्षम होने चाहिए।

हैकाथॉन के तहत प्रतिभागी पहले समस्या की पहचान और विचार तैयार करेंगे। इसके बाद प्रोटोटाइप विकसित करने, विशेषज्ञों और मेंटर्स से मार्गदर्शन लेने तथा समाधान को बेहतर बनाने के अवसर मिलेंगे। चयनित नवाचारों को पायलट प्रोजेक्ट, इन्क्यूबेशन और इंडस्ट्री लिंकेज की दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर भी दिया जाएगा।

हैकाथॉन में एआई आधारित सरकारी नॉलेज रिपॉजिटरी, सरकारी जानकारी को आसानी से खोजने और उपयोग करने वाली प्रणालियां, डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार करने में एआई का उपयोग, डेटा गवर्नेंस, एआई आधारित जीआईएस और पर्यावरणीय विश्लेषण जैसे विषयों पर भी समाधान विकसित किए जाएंगे। आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के आकलन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ड्रोन आधारित एरियल मॉनिटरिंग पर भी काम होगा।

उत्तराखंड में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की बड़ी मौसमी आवाजाही को देखते हुए यातायात दबाव का पूर्वानुमान लगाने, पर्यावरणीय दबाव की निगरानी करने, आपदा संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने वाले तकनीकी समाधानों पर भी जोर रहेगा। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के उपाय भी तलाशे जाएंगे।

आयोजकों के अनुसार हैकाथॉन में नागरिक केंद्रित और जिम्मेदार नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर शासन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा में तकनीक का इस्तेमाल मानवीय निर्णय क्षमता के सहयोगी के रूप में करने पर जोर रहेगा।

90 दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत ऑनलाइन आइडिएशन से होगी। इसके बाद प्रोटोटाइप निर्माण, मेंटरिंग और मूल्यांकन के विभिन्न चरण होंगे। देहरादून सहित राज्य के प्रमुख शैक्षणिक और तकनीकी केंद्रों में नवाचार गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।

हैकाथॉन का उद्देश्य उत्तराखंड के शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों, तकनीकी समुदाय और युवा इनोवेटर्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य की स्थानीय समस्याओं को स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीकी समाधानों के जरिए अवसरों में बदला जा सके।

यह पहल सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) द्वारा Axolotl Emprise LLP  तथा संस्थागत एवं इकोसिस्टम सहयोगियों के साथ आयोजित की जा रही है। इसका लक्ष्य ऐसे नवाचारों की श्रृंखला तैयार करना है, जो उत्तराखंड को अधिक स्मार्ट, सक्षम, लचीला और तकनीक-सक्षम राज्य बनाने में योगदान दे सकें।
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*भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण से विद्यार्थियों को देश की विविधता और विकास को करीब से समझने का अवसर : मुख्यमंत्री*

*देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के 68 मेधावी विद्यार्थियों का दल 16 सितंबर को भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण पर होगा रवाना*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कीर्तिनगर विकासखंड अंतर्गत स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण के 10वें संस्करण के तहत भ्रमण पर जाने वाले 68 मेधावी विद्यार्थियों के दल से भेंट की।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी यात्रा एवं तैयारियों की जानकारी ली तथा उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों को देश की विविधता, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, तकनीक और विकास को करीब से समझने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे अनुभव विद्यार्थियों के ज्ञान को कक्षा की सीमाओं से बाहर ले जाकर उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में सहायक होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थी भ्रमण के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं को समझें, वहां की उपलब्धियों से सीखें और अपने अनुभवों को अपने साथियों के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को देश के बड़े एवं प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिलना उनके भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में उद्देश्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने तथा गुरुजनों और माता-पिता के प्रति श्रद्धाभाव बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इतिहास बनाया है, उन्होंने सामान्य से असामान्य बनने के लिए निरंतर प्रयास किया है। यदि संकल्प दृढ़ हो और प्रयास सच्चे मन से किया जाए तो कोई भी ताकत सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस दिशा में उत्तराखण्ड को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में  राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण की पहल के लिए विधायक श्री विनोद कंडारी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगातार 10 वर्षों तक इस प्रकार के कार्यक्रम को संचालित करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
*जिला सहकारी बैंक के  नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से की शिष्टाचार भेंट* 

 *मुख्यमंत्री ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं, कहा—सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने में निभाएं महत्वपूर्ण भूमिका* 

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में जिला सहकारी बैंक के चुनाव में विजयी हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अपनी जीत से अवगत कराया और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला सहकारी बैंक के चुनाव में विजय प्राप्त करने वाले सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि चुनाव में मिली जीत जनता एवं प्रतिनिधियों के विश्वास का प्रतीक है और इसके साथ नई जिम्मेदारी भी जुड़ी है। उन्होंने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए सहकारिता क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

श्री धामी ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास और आर्थिक अवसरों का लाभ पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से अपने अनुभव एवं ऊर्जा का उपयोग करते हुए बैंक की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आमजन के हित में कार्य करने का आह्वान किया।

नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री श्री धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे उन्हें मिली जिम्मेदारी का पूरी प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सक्रियता से कार्य करेंगे।

इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक, उत्तरकाशी की नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्रीमती शारदा राणा, नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष श्री हरिमोहन सिंह चंद, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्री सतेंद्र राणा, नवनिर्वाचित निदेशक श्री जगमोहन राणा तथा भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री मनवीर सिंह चौहान उपस्थित रहे।
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🌹“उत्तराखण्ड के स्तम्भ” सम्मान के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नौटियाल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🌹

आज हमारे साथी एवं वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नौटियाल (DD News, दूरदर्शन) को पत्रकारिता एवं जनसरोकारों के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए “उत्तराखण्ड के स्तम्भ” सम्मान से सम्मानित किया गया।

देहरादून के आई.आर.डी.टी. सभागार, सर्वे चौक में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की 139वीं जयंती पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु भूषण खंडूड़ी जी एवं देहरादून के मेयर श्री सौरभ थपलियाल जी के हाथों उन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ। यह आयोजन भारत रत्न पण्डित गोविन्द बल्लभ पंत समारोह समिति और हिमालयन अध्ययन सामाजिक संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। 

अवधेश नौटियाल पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय से कार्यरत हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और समर्पण के लिए उन्हें यह सम्मान मिलना निश्चित रूप से हम सभी पत्रकार साथियों के लिए गौरव की बात है।

हमें गर्व है कि हमारे बीच एक ऐसे साथी हैं, जिन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं बल्कि जनसेवा और जनसरोकारों की आवाज उठाने का माध्यम बनाया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अवधेश नौटियाल को पुनः हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं। 💐

बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। 🌹🙏
उत्तर प्रदेश के हापुड़ की केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग, दमकल की गाड़ियां आग बुझाने में जुटीं। धौलाना थाना क्षेत्र के यूपीएसआईडीसी फेस वन में स्थित त्रिवेणी केमिकल फैक्ट्री में लगी है आग 
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कर्नाटक में रेस्क्यू के दौरान तेंदुए ने फॉरेस्ट ऑफिसर पर किया हमला

कर्नाटक के दावणगेरे में हाईवे पर कार की टक्कर से घायल हुए तेंदुए को रेस्क्यू करने पहुंची फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम पर अचानक हमला हो गया. अधिकारियों ने तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज किया था, लेकिन दवा का असर पूरी तरह होने से पहले ही उसने एक फॉरेस्ट ऑफिसर पर झपट्टा मार दिया. 
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चंपावत में सड़क बंद होने से डोली के सहारे एक किलोमीटर पैदल चल वाहन तक लाना पड़ा गंभीर मरीज
सीएम धामी ने नन्हे पर्वतारोहियों से की मुलाकात, बच्चों को दी बधाई
स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से की भेंट

 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में आज स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति, हरिद्वार के राष्ट्रीय महासचिव श्री जितेंद्र रघुवंशी के नेतृत्व में  प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके आश्रित परिवारों से जुड़े विभिन्न विषयों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का सर्वस्व न्योछावर करने वाले राष्ट्र के महान नायक हैं। उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ जीवन जी रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता सेनानियों तथा उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन की व्यवस्था के साथ ही उनके आश्रित परिवारों के हितों का भी ध्यान रखा जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों एवं उनके योगदान को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके नाम पर स्मारकों एवं अन्य सम्मानजनक पहलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और प्रदेश के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्र की आजादी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को इतिहास और जनमानस में सदैव जीवंत रखा जाए।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि स्वतंत्रता सेनानी एवं उनके उत्तराधिकारी परिवारों से जुड़े जायज विषयों का नियमों के अनुरूप प्राथमिकता से परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करते हुए नियमानुसार उचित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सम्मान एवं हितों के प्रति राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया।

 इस अवसर पर श्री सुरेश चंद्रा सुयाल, श्री अनुराग सिंह गौतम तथा श्री आदित्य सिंह सहित अन्य स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सदस्य भी उपस्थित थे |
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की बड़ी छलांग, देशभर में 12वें स्थान पर पहुंची राजधानी 

 तीन वर्षों में 37वें से 12वें स्थान तक का सफर, धामी सरकार के सतत प्रयासों और जनभागीदारी को मिली बड़ी सफलता

स्वच्छ और स्वस्थ उत्तराखंड की दिशा में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ने वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 3 से 10 लाख की जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में देशभर में 12वां स्थान प्राप्त किया है। देहरादून की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में शहर ने वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और तीन वर्षों की समग्र यात्रा में 37वें स्थान से 12वें स्थान तक की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

वर्ष 2024 में देहरादून इस श्रेणी में 41वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2025 में इसमें उल्लेखनीय सुधार करते हुए शहर 19वें स्थान पर पहुंचा और अब वर्ष 2026 में देहरादून ने 12वां स्थान हासिल किया है। यह लगातार सुधार केवल रैंकिंग में बदलाव नहीं, बल्कि शहर में वायु प्रदूषण की रोकथाम, धूल नियंत्रण, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर निगरानी, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने, सड़क सफाई, जनजागरूकता और पर्यावरणीय निगरानी के लिए किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की सफलता का प्रमाण है |

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ वायु को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए इस दिशा में ठोस एवं वैज्ञानिक उपायों पर विशेष जोर दिया है। सरकार की प्राथमिकता केवल प्रदूषण के स्तर को कम करना ही नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी और प्रभावी तंत्र विकसित करना है, जिसके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ, स्वस्थ और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके। देहरादून की रैंकिंग में हुआ यह सुधार इसी दीर्घकालिक सोच और निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप सामने आया है।

देहरादून नगर निगम एवं संबंधित विभागों द्वारा वायु गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई बहुआयामी रणनीति में आधुनिक तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया। शहर के संवेदनशील एवं सघन क्षेत्रों में धूल तथा प्रदूषक कणों को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन के माध्यम से जल छिड़काव किया गया। इसके साथ ही सड़क किनारे एवं प्रमुख मार्गों पर धूल के जमाव को कम करने के लिए यांत्रिक सफाई व्यवस्था को मजबूत किया गया तथा मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों के नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य सड़क की धूल से उत्पन्न होने वाले प्रदूषक कणों को नियंत्रित कर शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना रहा।

वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में खुले में कूड़ा एवं पराली जलाना भी शामिल है। इसे देखते हुए नगर क्षेत्र में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को खुले में कूड़ा जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में लगातार जागरूक किया गया। सरकार और स्थानीय निकायों की ओर से नागरिकों से स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक आदतों का हिस्सा बनाने की अपील की गई। प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी को जोड़ने का यह मॉडल देहरादून की वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

शहर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए भी निरंतर अभियान चलाए गए। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र यानी पीयूसी की नियमित एवं सघन जांच के माध्यम से ऐसे वाहनों पर निगरानी बढ़ाई गई, जो निर्धारित मानकों से अधिक उत्सर्जन कर रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ईवी अपनाने के लिए प्रोत्साहन के साथ शहर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए।

वायु गुणवत्ता सुधार के लिए केवल एक-दो विभागों के प्रयास पर्याप्त नहीं होते, बल्कि इसके लिए विभिन्न विभागों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास आवश्यक होते हैं। इसी सोच के साथ देहरादून में वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित की गई है। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इस निरंतर निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई ने शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

देहरादून की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के ‘स्वच्छ, स्वस्थ और सतत विकास वाले उत्तराखंड’ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है। राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करते हुए ऐसी व्यवस्थाओं पर जोर दे रही है, जिनमें शहरों का आर्थिक एवं आधारभूत विकास भी हो और पर्यावरणीय गुणवत्ता भी बनी रहे। राजधानी देहरादून का स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लगातार बेहतर प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि योजनाबद्ध प्रयासों, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

यह उपलब्धि देहरादून नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संबंधित विभागों, सफाई एवं पर्यावरण कर्मियों तथा शहर की जागरूक जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विशेष रूप से देहरादून के नागरिकों द्वारा स्वच्छता, कूड़ा प्रबंधन, खुले में कचरा न जलाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति दिखाई जा रही जागरूकता ने सरकार के प्रयासों को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री श्री धामी ने भी समय-समय पर पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नागरिकों से स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया है।

देहरादून के साथ ही उत्तराखंड के अन्य शहरों ने भी वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया है। राज्य के ऋषिकेश और काशीपुर शहरों में भी पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी वायु गुणवत्ता सुधार के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजनाएं लागू की जाएं और स्वच्छ वायु के इस अभियान को पूरे उत्तराखंड में व्यापक जनअभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की उपलब्धि पर देहरादूनवासियों, नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित विभागों को बधाई देते हुए कहा कि........

 *“स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून का 37वें से 12वें स्थान पर पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि देहरादून की जागरूक जनता की सक्रिय भागीदारी, नगर निगम देहरादून के समर्पित कार्यों तथा उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सतत निगरानी का सम्मिलित परिणाम है। सरकार का प्रयास है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। स्वच्छ वायु केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के स्वस्थ जीवन और बेहतर भविष्य से जुड़ा विषय है। देहरादून की यह उपलब्धि हमें और बेहतर करने की प्रेरणा देती है। मैं देहरादूनवासियों एवं सभी संबंधित विभागों को हार्दिक बधाई देता हूं और विश्वास करता हूं कि स्वच्छ वायु के लिए यह सामूहिक प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।”*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को राजपुर रोड देहरादून स्थित होटल में  सर्राफ मंडल देहरादून द्वारा आयोजित भव्य एग्जीबिशन का अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एग्जीबिशन में प्रदर्शित विभिन्न प्रकार के आभूषणों, पारंपरिक डिजाइनों और स्वर्णकारों की कला एवं हुनर का अवलोकन किया तथा आयोजकों और स्वर्णकार समाज को इस आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
एसएसपी दून के नेतृत्व में नशा तस्करों के विरूद्ध एक्शन मोड में दून पुलिस 

मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त 01 नशा तस्कर आया दून पुलिस की गिरफ्त में 

अभियुक्त के कब्जे से लगभग 02 लाख रुपए से अधिक मूल्य की 7.50 ग्राम स्मैक व तस्करी मे प्रयुक्त स्कूटी हुई बरामद
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को जसवंत सिंह ग्राउंड, गढ़ी कैंट, देहरादून में आयोजित  गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरितालिका तीज उत्सव को सरकारी स्तर पर और अधिक भव्य रूप से आयोजित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने गोर्खाली समाज की माताओं-बहनों को हरितालिका तीज की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरितालिका तीज माता पार्वती की अटूट तपस्या, विश्वास, समर्पण और शक्ति का प्रतीक है। यह पर्व हमें दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। माताएं और बहनें हमारी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों की सबसे बड़ी संरक्षक हैं। उनके प्रयासों से हमारी भाषा, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोर्खाली समाज अपनी वीरता, निष्ठा, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के लिए जाना जाता है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोर्खा वीरों ने सदैव अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की गोर्खा समाज की भावना पर पूरे देश को गर्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में गोर्खाली समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षा, खेल, कला-साहित्य और समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
‘हर काम देश के नाम’

भारतीय सेना की कोर ऑफ़ इंजीनियर्स के माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान को हरी झंडी दिखाई गई।

भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ़ इंजीनियर्स की ओर से माउंट त्रिशूल (7,120 मीटर / 23,360 फ़ीट) के लिए एक पर्वतारोहण अभियान को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह गढ़वाल हिमालय की सबसे मुश्किल चोटियों में से एक पर चढ़ने के एक चुनौतीपूर्ण प्रयास की शुरुआत थी।

इस समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें सेंट्रल कमांड के GOC-in-C लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया शामिल थे। कॉर्प्स ऑफ़ इंजीनियर्स के कई अनुभवी अधिकारी, जो पर्वतारोहण में अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं, भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने अभियान दल के साथ बातचीत की।

गढ़वाल हिमालय में 7,120 मीटर (23,360 फ़ीट) की ऊंचाई पर स्थित माउंट त्रिशूल, अत्यधिक ऊंचाई, मुश्किल रास्तों और अनिश्चित मौसम की चुनौतियों का एक कठिन मिश्रण पेश करता है। यह अभियान टीम की शारीरिक सहनशक्ति, तकनीकी दक्षता, मानसिक मज़बूती और ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता की परीक्षा लेगा।

अनुभवी अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों और अन्य रैंक के जवानों से बनी इस अभियान टीम ने मिशन के लिए कड़ी तैयारी की है। इसमें ऊंचाई वाले माहौल के अनुकूल ढलना (acclimatisation), ज़बरदस्त शारीरिक ट्रेनिंग और पर्वतारोहण की तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण शामिल है। चढ़ाई से जुड़ी तकनीकी और लॉजिस्टिकल चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक योजना बनाई गई है।

समारोह की शुरुआत अभियान टीम लीडर की विस्तृत प्रस्तुति और ऑपरेशनल ब्रीफिंग के साथ हुई। ब्रीफिंग में प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम, चढ़ाई और हमले के रास्ते, सुरक्षा प्रोटोकॉल और हिमालय के मुश्किल रास्तों व तेज़ी से बदलते मौसम से निपटने के लिए प्रशासनिक इंतज़ामों के बारे में जानकारी दी गई।

सभा को संबोधित करते हुए, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान टीम की शारीरिक फ़िटनेस, मानसिक मज़बूती और टीम भावना (esprit de corps) के उच्च स्तर की सराहना की। उन्होंने सैपर्स की रोमांच और पर्वतारोहण उपलब्धियों की शानदार विरासत पर प्रकाश डाला और नेतृत्व, सहनशक्ति, अनुशासन, टीम वर्क और सोच-समझकर जोखिम उठाने जैसे गुणों को विकसित करने में ऐसे अभियानों के महत्व को रेखांकित किया। ये गुण सैन्य तैयारी में, खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में, महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

कॉर्प्स के अनुभवी पर्वतारोहियों की मौजूदगी ने इस मौके की अहमियत को और बढ़ा दिया, जो कॉर्प्स ऑफ़ इंजीनियर्स के भीतर रोमांच, साहस और पेशेवर उत्कृष्टता की स्थायी परंपरा को दर्शाता है। समारोह का समापन टीम लीडर को औपचारिक 'एक्सपेडिशन फ़्लैग' सौंपने के साथ हुआ। इसके साथ ही टीम को बेस कैंप की यात्रा और उसके बाद माउंट त्रिशूल पर चढ़ाई के लिए औपचारिक रूप से रवाना किया गया।

यह अभियान 'कोर ऑफ़ इंजीनियर्स' की पर्वतारोहण की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाता है और सबसे कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय सेना के साहस, दृढ़ता, टीमवर्क और उत्कृष्टता की भावना को दर्शाता है।
बाजपुर में सालों से नहीं हुआ लेवड़ा नदी की समस्या का समाधान, हर साल जनता होती है परेशान
नंदा देवी राजराजेश्वरी बड़ी जात डोली विदा

 <nis:link nis:type=tag nis:id=chamoli: nis:value=chamoli: nis:enabled=true nis:link/> सिद्धपीठ कुरुड़ से मां नंदा देवी राजराजेश्वरी की ऐतिहासिक बड़ी जात यात्रा का विधिवत शुभारंभ शनिवार, 5 सितंबर 2026 को हो गया। 12 वर्ष में आयोजित होने वाली मां नंदा की बड़ी जात यात्रा में मां की डोली सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश के लिए रवाना हुई। डोली की विदाई के दौरान पूरा क्षेत्र मां नंदा के जयकारों और ढोल-दमाऊं की थाप से गूंज उठा। यात्रा को लेकर कुरुड़ समेत आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।

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सड़क किनारे परेशान युवती को देख ऋषिकेश विधायक ने रुकवाया काफिला, पुलिस को दी सूचना
बिना मान्यता संचालित मदरसों पर धामी सरकार की कार्रवाई जारी, देहरादून और हल्द्वानी में कार्रवाई