ये रवैया कहां तक सही है? क्या परेशानी है कुर्ता पायजामा में? क्या किसी व्यक्ति की पहचान उसके वस्त्रों से होती है? अगर ऐसा है तो फिर ना विवेकानंद मिलते ना गांधी। और सिर्फ वस्त्र के आधार पर वेतन बंद करना ये कहां का न्याय है?
443 views | Islampur, Nalanda | Jul 12, 2022