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पं. आशीष द्विवेदी

@ashish_4343
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"परत दर परत पलटता जाता हूं, कुछ इस तरह जिंदगी जिए जाता हूं"
"फ़सल कामयाबी की काट लेते, गर हम भी तलवे चाट लेते"
"रूठ कर मुझसे जो तुम जाने लगे
बाद मुद्दत मुझे तुम याद आने लगे"
"कहता हूं बात दिल की मैं लिखता हूं शायरी"
"ख़ामोशी को चुना है मैने, क्या कहें कितना सुना है मैने"
"गर मिट्टी में ही डर जाता, तो बीज पेड़ न बन पाता"
"कब क्या ज़ुबां पर आ जाए कोई जानता नहीं, कब कौन किसका भला करे पहचानता नहीं"
झूठ की दरख़्त नहीं चढ़ता, सच की परख नहीं करता!
ज़मीन पर रहने की आदत है, सपनों के महल नहीं गढ़ता!!
"मुझसे दर्द छुपाना कठिन हो गया, गीत अब गुनगुनाना कठिन हो गया"
रंग ऐसे लगाओ मिले दिल और मन
"गुनाह किसी ने किया कसूरवार तुम रहे, वो करके गुनाह बेफिक्र रहा शर्मशार तुम रहे"
"मेरा लहज़ा मेरी हर बात जिन्हें लगती है बुरी"
"हर मजार ओ दर पे सर झुकाया है"
"जिंदगी सांसों पे बहुत भारी है बाकी सांसों की लंबी उधारी है"
"कश्ती मेरी मझधार में है और जीवन है भव सागर में"
"है चाह मेरी इतनी छोटी समा जाए जो गागर में"
"उन्हीं पौधों की तरह हैं हम रिश्ते भी, वक्त बे वक्त पानी दे दिया कीजिए"
"मेरी आंखों में नींद नहीं शिकायत बहुत है"
"खुद को भूलूं तो मेरी पहचान संवार देती है"
"वो "मां" है जो हर तकलीफ़ से उबार लेती है"
"तेरी दयार ए मोहब्बत पे हाज़िरी लगा के"
"नाम तुम्हारे लिख दिया इस जीवन का सार"
"बात उल्फ़त की न मोहब्बत की होगी, जब भी होगी बस ज़रूरत की होगी"
"कितनी मुश्किल में खेला तुम्हारी बिना, मां बिलकुल अकेला तुम्हारे बिना"
"मोहब्बत अब और न की जाती है, रस्में काफ़ी हैं निभा जाने के लिए"
"हम मज़ारों में भी सर झुका लेते हैं, और मंदिरों में घंटा बजा लेते हैं"
"मुफलिसी से गुज़रा हूं कुछ इम्तहान बाकी है"