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Prem Prakash Kumar

@premranjana
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सफाई गंदगी के साथ साथ, समाज में पड़े गंदे लोगो का भी होना जरूरी है।
सफाई जरूरी है, अपने आस पास की गन्दगी हो या समाज में फैले गंदे लोग हो।
बिहार की हाईटेक सड़के की सच्चाई बस यही है कि बरसात का पानी रोड पे और नाली का भी पानी फॉर लेन जैसी हाईटेक रोड पे
गजब की सड़कें गजब का पुलिया।
जिस सड़क से पुल की उचाई 4 फिट हो, तो उस सड़क से लोग गुजरेंगे कैसे।
इंजीनियरों का डिग्री मे आग लगा दो भाई
कमाल के राज्य बिहार में कमाल का विकाश हुआ है, 6 महीना में नई नवेली रोड टूटने फूटने लगा है।
सड़के है खराब, बिहार हो रहा है बर्बाद
काबिल ठेकेदार का लाइसेंस और पढ़ल लिखल सरकारी इंजीनियरों का डिग्री में आग लगा देना चाहिए।
अभी <nis:link nis:type=tag nis:id=भादो nis:value=भादो nis:enabled=true nis:link/> आया नहीं तब तक चकिया नगर परिषद की सड़कों पे बिकाश की <nis:link nis:type=tag nis:id=गंगा nis:value=गंगा nis:enabled=true nis:link/> बहना शुरू हो गया है।
बिहार में विकास की गंगा सड़को से होकर बह रही है....
ये बिहार की कलंक गाथा....
बदहाल बिहार के, बदहाली और गुमनामी की गाथा।
बिहार के सभी जुझारू एवं ईमानदार जनप्रतिनिधियों को समर्पित....
पब्लिक ऐप पर एंकर फौज़ान जी के साथ की बातचीत।
डेली वर्कर की हालत बेहद दयनीय, सरकार द्वारा 5 किलो या 10 किलो अनाज दे देने से कुछ नहीं होगा: प्रेम प्रकाश कुमार
इस वीडियो को मेरे कैमरा मैन विकाश जी ने गजब का एडिटिंग किया है। आवाज़ मेरा ही है लेकिन तस्वीर किसी दुसरे मुद्दे की है।
परतापुर पंचायत में सड़कों को लेकर पूरे 25 वर्षों में कितना विकाश हुआ है। इस वीडियो में साफ साफ दिख रही है।
जब जनप्रतिनिधि और आम जनता हुए आमने सामने तो क्या कुछ बोल दिया आम जनता ने जनप्रतिनिधि के सामने....
मुखिया जी जितने के बाद पहचानते ही नहीं, सुनिए घपाच मुखिया की कहानी
मृत अंशु कुमारी के मौत पे परिजन और ग्रामीणों ने क्या कुछ बोला, देखिए ग्राउंड "0" की रिपोर्ट
हत्या या प्राकृतिक मौत, नहीं सुलझ पाई अंसु कुमारी की मौत की गुत्थी
लानत स्वीकार कीजिएगा साहब, आपकी जनता है बेहाल। कोई नहीं है पूछने वाला हाल.....
सरकार का दावा है कि मेरा बिहार बदल रहा है। लेकिन जमीनी स्तर की सच्चाई कुछ और ही बयां करती है।
जहां कुछ बुद्धिजीवी, लोगो को लुभाने, बहलाने, रिझाने में लगे है। वहीं हम लोगो के रुके हुए कामो को निपटाने में लगे हैं।।
11 वर्षों से पेंशन के लाभ से बंचित इस भाई का दर्द आप भी जान लीजिए।
चारो तरफ से चक्कर काट कर, हताश और निराश होकर जब ये चाचा मेरे पास आए, तो आंखो में विश्वास की एक उम्मीद लेकर आए थे।