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मुमताज अली

@mumtazali786az
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हर तरफ नफरतों का बाजार सजा रखा है ये संघ भगवा बाले 
शायद इन्हे मालूम नही के हिंदुस्तान में जम्हूरियत का मजबूत बुनियाद है
मुल्क की जम्हूरियत और संविधान को हम खतरे परने नही देंगे हम जुल्म और जालिम के खिलाफ इंकलाब की आवाज बुलंद करेंगे
दुनियां की सबसे खूबसूरत मीनार व मस्जिद 
जिसे सारी दुनियां अदब से देखा करती है अपना सर झुकाकर
हर तरफ चारो तरफ इंसानियत का पैगाम पहुंचाना मेरा मकसद है यही सबब मुल्क की तरक्की का रास्ता खुलेगा
आवाज से आवाज मिलकर इंकलाब से जुल्म की बुनियाद हिलाकर हम रख देंगे  बुलंद हौसले है मेरे
सच की आवाज से झूठ की बुनियाद हिला देंगे हम जुल्म की दीवारों को इंकलाब की आवाज से गिरा देंगे हम
हर खेत को पानी हर हांथ को काम हर पेट को रोटी हर इंसान को रोजी और काम देना होगा वर्ना गद्दी से उतरना होगा
हर गांव और गरीब की खिदमत हर जरूरतमंदो की मदद करना ही हमारा मकसद है यही ख्याल दिलो में है
जरूरतमंदो की मदद और इंसानी खिदमत ही हमारा मकसद है  यही पैगाम हमारा है दिलो दिमाग में
इंसानी खिदमत और हर जरूरतमंदो की मदद करना ही हमारा मकसद है यही पैगाम हमारा है
हर मजबूर मजलूम कमजोर लाचार की मदद करना ही हमारा मकसद है यही पैगाम हमारा है
समाजवाद की आंधी में  उड़ जायेगा संघवाद यही मकसद है हमारा इंकलाबी आवाज बुलंद करना
इंकलाब की आवाज को जुल्म जालिम लाठी गोली से दवा नही सकता जम्हूरियत की यही पहचान है
इंसानी खिदमत जरूरतमंदो की मदद ही हमारा मकसद है 
यही पैगाम हमारा है हर घर तक हर लोगो तक
इंकलाब की आवाज बुलंद करना हमारा मकसद है अंजाम की परवाह नही है हमे जम्हूरियत और आजादी खतरे में है इस हुकूमत में
मुल्क की हालात। बेहद  कमजोर व खतरनाक दौर से गुजर रहा है संघी भगवा हुकूमत ने मुल्क की भाईचारगी तरक्की  खत्म कर रही है
संधियों के मुराद कभी पूरा नहीं होगा समाजवाद के तूफान में उड़ जायेगा संघवाद का नफरती जमात
समाजवाद का सफर बहुत ही खूबसूरत होती है इंकलाब की गूंज सुनाई दे रही है सड़को पे इस जुल्मी हुकूमत के खिलाफ
समाजवादी पार्टी के नेशनल कन्वेंशन में शालिम हुआ मै 
इंकलाब की आवाज बुलंद करना होगा
समाजवादी पार्टी का नेशनल कन्वेंशन लखनऊ के रमाबाई पार्क मैदान में  आज मुकम्मल हुआ हमने स्टेट डेलीगेट्स बनकर शामिल हुआ
हर इंसान के जिंदगी में कोई न कोई दाग होता है बाद मरने की हर शख्स उसकी खूबियों को याद किया करता है
दल किसी के सियासत का जरिया होता है मगर दिल तो इंसानों को आपस में मुहब्बत और भाईचारगी का सिलसिला होता है
इंकलाब का आगाज अब जमी पे होने बाला है 
संघवाद जाने बाला है समाजवाद आने बाला है
इंकलाब मेरे लहू में है क्यूं रगो में मेरा  किरदार  अपने खानदान बालों का है  हम लड़ना जानते है लड़कर ही लेंगे हक अपना
इंकलाब की आवाज बुलंद करने निकले है हम एक सेंट्रल मिनिस्टर नागमणि जी के साथ