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Dharmdeo Yadav

@dharmdeoyadavjhajha
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सिया के देखरेख में मैं...😊
शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति ग़लत तरीके से होने से पढ़ाई मात्र औपचारिकता भर रह गयी है।
शिक्षक चाहें, तो हरेक बच्चा स्कूल से जागरूक नागरिक बनकर निकले...
खेल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है.. बल्कि, खेल से शारीरिक, मानसिक मजबूती के साथ और कई अवसर प्रदान करती है।
बच्चों को स्कूल भेजिये, कमाई के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है।
बाराजोर फाइटर क्रिकेट क्लब द्वारा आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन...
क्रिकेट फाइनल मैच 
तेलियाडीह, झाझा/बनाम/बेलहर 
स्थान:-दरियो,बोड़बा(झाझा)
शिक्षक और अभिभावक अपनी-अपनी शिकायतों,चिंताओं और विवशताओं को लेकर अड़े-भिड़े नज़र आते हैं।
जतरा...आदि काल से कला-संस्कृति और परम्परा पालन का आदिवासी समाज का एक प्रमुख त्योहार।
उद्देश्य है -बच्चे रेगुलर स्कूल आवें।
एक बढ़िया स्कूल खुलने से सौ जेलखानों के बंद होने का रास्ता तैयार हो जाता है।
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय का उद्घाटन..
दस हजार से दुकान ही खुलेगी। उत्पादन यूनिट लगाने के लिए बड़ी पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है।
बच्चे अपने उम्र और वर्ग के हिसाब से दक्षता रखता है कि नहीं,इसकी जाँच जरूरी है।
जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी...
कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी जगह..बच्चों की पढ़ाई से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। लेकिन,हो रही है सिर्फ खानापूर्ति..
कैसी नियति है?हवाई जहाज से परदेस कमाने गया विकास लौटा मौत के रथ पर... अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
"नारी अदालत" गठन पर वर्कशॉप।
बाराजोर, झाझा, जमुई
बच्चे रोज स्कूल क्यों नहीं आते?
संविधान की ताकत को जिसने जितना समझा उसका उतना भला हुआ...
गरीबी काहे है?..काहे कि पढ़े-लिखे नहीं हैं। पढ़े-लिखे क्यों नहीं?.. काहे कि गरीब हैं।
समाज में पुलिस प्रशासन का भय रहना चाहिए.. लेकिन, जब पुलिस  प्रशासन ही लोगों को भयभीत करने लगे.. तो?
बच्चों का आचरण घर, परिवार, समाज, स्कूल में मिली सीख के आधार पर निर्भर करता है।
अगर इस तरह का कानून होता, तो जमीन विवाद का फैसला करने में ग्रामीण पंचों के लिए आसान हो जाता।