शिक्षा के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च करने के दावे ज़मीन पर कितने खोखले हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण है सुहागपुरा ब्लॉक का बोरखेड़ा गांव। यहां राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की हालत इतनी खस्ताहाल है कि हर दिन करीब 100 बच्चे जान हथेली पर लेकर पढ़ाई करने पहुंचते हैं।पूरे विद्यालय भवन की छतें और दीवारें दरक चुकी हैं। बरामदे की छत पहले ही ढह चुकी है