प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार से कहा- आपने देश और प्रदेश की सेवा की है। अब आप रिटायर हो चुके हैं। समाज की सेवा कर चुके हैं। अब भगवान का स्मरण कीजिए। ऐसे कर्म करिए कि अगले जन्म में फिर मनुष्य बनें। क्योंकि यह जन्म 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मिलता है इसलिए भगवान का स्मरण सभी विपत्तियों से बचा लेता है। अब आप ईश्वर का सुमिरन करते रहिएगा।