#"मन के भाव"#प्रेरणादायक
"रेल की खिड़की से बाहर देखते हुए जब उगता हुआ सूरज दिखाई देता है, तो ऐसा लगता है मानो स्वयं परमात्मा अपनी सृष्टि के माध्यम से हमें कोई गहरा संदेश दे रहे हों। हर सुबह का सूर्योदय केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि ईश्वर का यह संकेत है कि जीवन में कितनी भी अंधेरी रात क्यों न आए, प्रकाश का मार्ग कभी बंद नहीं होता।
इस विशाल सृष्टि को चलाने वाली वह परम शक्ति बिना किसी शोर के अपना कार्य कर रही है। सूरज समय पर उगता है, समय पर ढलता है, ऋतुएँ बदलती हैं, नदियाँ बहती हैं और जीवन आगे बढ़ता रहता है। प्रकृति का हर दृश्य हमें ईश्वरीय व्यवस्था और अनुशासन का पाठ पढ़ाता है।
रेल का यह सफर भी जीवन की यात्रा जैसा है। रास्ते में कई स्टेशन आते हैं, कुछ लोग साथ जुड़ते हैं, कुछ बिछड़ जाते हैं। कुछ चेहरे याद बन जाते हैं और कुछ पल अनुभव। लेकिन जैसे ट्रेन अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रहती है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
ढलता हुआ स�
Koil, Aligarh | Jun 9, 2026