फिरोजाबाद जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) शत्रोहन वैश्य के साथ विकास भवन में विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया और दफ्तरों में बैठकर फाइलों को देखने के बजाय, सीधे शिकायतकर्ताओं को फोन मिलाकर निस्तारण की जमीनी हकीकत जानी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सबसे पहले समाज कल्याण विभाग पहुँचे। वहाँ उन्होंने लंबित शिकायतों की फाइलें खुलवाईं और सीधे शिकायतकर्ता राजवीर यादव को फोन लगा दिया। डीएम ने दूरभाष पर उनसे वृद्धावस्था पेंशन मिलने की स्थिति पूछी, जिस पर शिकायतकर्ता ने पेंशन मिलने की पुष्टि की और कार्रवाई पर पूरी संतुष्टि जताई।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVAO) कार्यालय में भारी लापरवाही उजागर हुई। हाथवंत ब्लॉक स्थित रेवा गौशाला के संबंध में अनिल कुमार द्वारा की गई एक शिकायत का निस्तारण केवल कागजों पर मिला, जिसकी जमीनी हकीकत कुछ और थी। जिस पर जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि , "सभी अधिकारी शिकायत बंद करने से पहले शिकायतकर्ताओं से टेलीफोन पर वार्ता कर सही स्थिति की जानकारी अवश्य लें। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक और पात्र व्यक्ति तक शत-प्रतिशत पहुँचे।"
अर्थ एवं सांख्यिकी कार्यालय के निरीक्षण के दौरान जब, जिलाधिकारी ने जिले की महिलाओं की 'प्रति व्यक्ति आय' (Per Capita Income) से जुड़े आंकड़े मांगे, तो दफ्तर में सन्नाटा पसर गया। वहां मौजूद कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इसका स्पष्ट उत्तर नहीं दे सका। जिलाधिकारी ने इसे अत्यंत खेदजनक और घोर लापरवाही बताते हुए स्थिति में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने बड़ी परियोजनाओं की जांच रिपोर्टों की समीक्षा करते हुए आदेश दिया कि, जिन कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ अधिकारियों की निगेटिव रिपोर्ट आई है, उन्हें तुरंत नोटिस जारी कर ब्लैकलिस्टिंग व अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
विकास भवन परिसर में जगह-जगह व्याप्त गंदगी को देखकर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और सभी प्रभारियों को अपने-अपने कार्यालय सहित पूरे परिसर को साफ रखने के सख्त निर्देश दिए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) और जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि, आंगनबाड़ी व अन्य बाल/महिला कल्याण संबंधी शिकायतों के ट्रैक रिकॉर्ड के लिए एक अलग से शिकायत निस्तारण रजिस्टर तैयार किया जाए, ताकि इसकी नियमित निगरानी हो सके। इस व्यापक औचक निरीक्षण के दौरान उपायुक्त स्वतः रोजगार कार्यालय, ग्रामीण अभियंत्रण कार्यालय, जिला उद्यान कार्यालय तथा डीपीओ कार्यालय सहित विकास भवन के लगभग सभी प्रमुख पटलों की बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान परियोजना निदेशक (PD) सुभाष चंद्र त्रिपाठी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।