हम सिस्टम के खिलाफ लड़ते है और सिस्टम हम से ही पंगे ले रहा है।
गलत बिल्कुल बर्दास्त नहीं करेंगे।
जब रुल सबके लिए बराबर है तो उसे बराबर रखना हमारी जिम्मेदारी बनती है। गरीब जनता, छोटे किसान, मजदूर अगर गलती से या एमरजेंसी में कोई तार जोड़ ले, या बिजली बिल न जमा कर पाए, तो उसके पास समन, प्लेंटी, पता नहीं क्या जोड़ कर उस गरीब की जान निकाल दी जाती है, आए दिन किसान बिजली बिल न जमा करने की वजह से या पानी, ट्यूबवेल की बिजली न आने की वजह से खेती लायक पानी न होने की वजह से आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाता है, और उसका उसे हर्जाना भुगतना पड़ जाता है पर जो इंसान एक रुतबा रखता है, बड़ी अप्रोच रखता है उसके घरों में यह सब माफ है।
यह कैसे हो सकता है?