भारत विकास परिषद् की भिवानी शाखा ने गांव कितलाना में रोपे 108 पौधे, ली संरक्षण की जिम्मेवारी
पौधे लगाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि धरती के प्रति हमारा ऋण है : सज्जन सोनी
भिवानी, 09 जून : आज जिस प्रकार से पर्यावरण प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ रही है, उसका सबसे बड़ा कारण पेड़ों की अंधाधुंध कटाई है। ऐसे में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से निजात पाने के लिए जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति पौधारोपण जैसी मुहिम को अपनाएं। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से भारत विकास परिषद् की भिवानी शाखा द्वारा गांव कितलाना स्थित श्रीकृष्ण गौशाला तथा संत गंगानाथ नर्सिंग कॉलेज परिसर में पहुंचकर फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के कुल 108 पौधे रोपे। इस पुनीत कार्य की सबसे विशेष बात यह रही कि परिषद् ने केवल पौधे लगाने तक अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी, बल्कि सभी 108 पौधों की पूर्ण रूप से देखभाल करने और उन्हें वृक्ष बनाने का सामूहिक संकल्प भी लिया।
यह कार्यक्रम भारत विकास परिषद् की भिवानी शाखा की अध्यक्षा काजल नितिन अग्रवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जबकि नेतृत्व परिषद् के पर्यावरण संयोजक सज्जन सोनी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक डॉ. शिव शंकर भारद्वाज, विशिष्ट अतिथि के रूप में गौशाला प्रधान समंदर सिंह तथा कितलाना गांव के सरपंच प्रतिनिधि रत्न सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे और पर्यावरण की इस मुहिम में अपना सक्रिय योगदान दिया।
इस मौके पर भारत विकास परिषद् भिवानी शाखा के पर्यावरण संयोजक सज्जन सोनी ने कहा कि आज जिस तरह से तापमान बढ़ रहा है और पर्यावरण असंतुलित हो रहा है, उसे देखते हुए पौधारोपण अब केवल एक शौक या औपचारिकता नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारी धरती मां के प्रति एक नैतिक ऋण और हमारी आने वाली पीढिय़ों के अस्तित्व का सवाल है। उन्होंने बताया कि इस दौरान नीम, पीपल, बड़ (बरगद) जैसे 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों के साथ-साथ आंवला, जामुन, बेलपत्र और शहतूत जैसी फलदार व औषधीय प्रजातियां शामिल रहे।
पूर्व विधायक डॉ. शिव शंकर भारद्वाज ने भारत विकास परिषद् के इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि गौशाला और शैक्षणिक संस्थान जैसी पवित्र जगहों पर पौधे लगाना अपने आप में अनुकरणीय है। इससे विद्यार्थियों और ग्रामीणों में भी प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना जागृत होगी। गौशाला प्रधान समंदर सिंह और सरपंच प्रतिनिधि रत्न सिंह ने परिषद् को आश्वस्त किया कि ग्रामीण स्तर पर भी इन पौधों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।