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दिया तले अंधेरा: *एक माह पहले नोटिस, फिर भी कार्रवाई नहीं; शासन की जमीन पर कब्जा जिम्मेदार मौन* छतरपुर। नई तहसील कार्यालय के सामने स्थित शासन की भूमि पर कथित कब्जे और अवैध लेनदेन के मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने करीब एक माह पहले नोटिस जारी किया था, लेकिन इसके बाद न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही अतिक्रमण हटाने के प्रयास दिखाई दिए। इससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार खसरा क्रमांक 3062, जो राजस्व अभिलेखों में मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज बताया जाता है, पर कुछ लोगों द्वारा कब्जे और लेनदेन की कोशिशें की जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। एक माह से फाइलों में कैद कार्रवाई सूत्रों के अनुसार संबंधित विभाग द्वारा करीब एक माह पूर्व नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। सवाल यह उठ रहा है कि जब मामला शासन की भूमि से जुड़ा है तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मौन क्यों हैं? तहसील कार्यालय के सामने ही शासन की जमीन पर नजर विवादित भूमि नई तहसील कार्यालय के सामने और बुंदेला बब्बा मंदिर क्षेत्र के पास स्थित है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जमीन का बाजार मूल्य काफी अधिक है, जिसके चलते भू-माफियाओं की नजर इस पर टिकी हुई है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो शासन की बहुमूल्य संपत्ति पर स्थायी कब्जे का खतरा बढ़ सकता है। अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नोटिस जारी कर देना ही पर्याप्त नहीं है। यदि एक माह बीत जाने के बाद भी अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो इससे प्रशासन की मंशा और कार्यशैली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। जांच और सख्त कार्रवाई की मांग क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खसरा क्रमांक 3062 की स्थिति की तत्काल जांच कराई जाए तथा शासन की भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा तो सरकारी भूमि को बचाना मुश्किल हो सकता है। एक माह पहले जारी नोटिस के बाद भी कार्रवाई का इंतजार कर रही यह सरकारी जमीन अब प्रशासन की जवाबदेही और भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव की कहानी बयां कर रही

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गाँव-गाँव लग्जरी गाड़ियों से शराब की तस्करी, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कारोबार?

छतरपुर जिले में अवैध शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्राम आमखेरा लुगासी के पास दुर्घटनाग्रस्त हालत में मिली कार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लग्जरी गाड़ियों के माध्यम से गाँव-गाँव अवैध शराब की सप्लाई की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय मौन साधे हुए हैं।

यदि क्षेत्र में खुलेआम शराब की तस्करी हो रही है तो आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और यदि जानकारी थी तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि बिना विभागीय संरक्षण और मिलीभगत के इतना बड़ा अवैध नेटवर्क संचालित होना संभव नहीं है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन छोड़कर तस्करों का फरार हो जाना भी कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

जनता पूछ रही है—
अवैध शराब की सप्लाई करने वाले कौन हैं?

इनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई?

क्या आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच होगी?

गाँव-गाँव पहुँच रही शराब पर रोक लगाने की जिम्मेदारी कौन लेगा?

जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक अवैध शराब का यह कारोबार यूँ ही फलता-फूलता रहेगा और प्रशासनिक दावे सवालों के घेरे में रहेंगे।

गाँव-गाँव लग्जरी गाड़ियों से शराब की तस्करी, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कारोबार? छतरपुर जिले में अवैध शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्राम आमखेरा लुगासी के पास दुर्घटनाग्रस्त हालत में मिली कार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लग्जरी गाड़ियों के माध्यम से गाँव-गाँव अवैध शराब की सप्लाई की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय मौन साधे हुए हैं। यदि क्षेत्र में खुलेआम शराब की तस्करी हो रही है तो आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और यदि जानकारी थी तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि बिना विभागीय संरक्षण और मिलीभगत के इतना बड़ा अवैध नेटवर्क संचालित होना संभव नहीं है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन छोड़कर तस्करों का फरार हो जाना भी कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जनता पूछ रही है— अवैध शराब की सप्लाई करने वाले कौन हैं? इनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच होगी? गाँव-गाँव पहुँच रही शराब पर रोक लगाने की जिम्मेदारी कौन लेगा? जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक अवैध शराब का यह कारोबार यूँ ही फलता-फूलता रहेगा और प्रशासनिक दावे सवालों के घेरे में रहेंगे।

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