
बिग ब्रेकिंग:जमीन निकल गई, आसमान खा गया... कहाँ गई बबीता?"
दयारा बुग्याल से लापता हुई रामनगर की बेटी, 10 दिन बीत गए - सुराग नहीं
उत्तरकाशी। उत्तराखंड का मशहूर बुग्याल 'दयारा'... बुग्याल मतलब स्वर्ग का मैदान। पर इसी स्वर्ग से एक पहाड़ी बेटी धरती में समा गई। 24 साल की बबीता पांडे, रामनगर चिल्किया की रहने वाली, MBA की छात्रा। 29 मई की रात दयारा बुग्याल के 'गोई' बेस कैंप से गायब हुई, तब से *'जमीन निकल गई, आसमान खा गया'।
आखिर कहाँ गई बबीता? क्यों नहीं मिल रही?
1. आखिरी रात क्या हुआ था?
25 मई को बबीता अपने दो दोस्तों - हरमनपाल सिंह रुद्रपुर और हरमनप्रीत सिंह शाहजहांपुर के साथ देहरादून आई थी। हर्षिल, गंगोत्री घूमी।
29 मई की शाम 4 बजे ट्रेकिंग करके गोई कैंप पहुंची। रात करीब 11 बजे बबीता टेंट से बाहर निकली, फोन पर गाने सुन रही थी। साथी सो गए।
सुबह 4 बजे टेंट खाली था, फोन स्विच ऑफ। बस... फिर कुछ पता नहीं।
10 दिन से जंग छिड़ी है पहाड़ों में।
'आसमान खा गया' वाली कहावत सच हो रही है। NDRF, SDRF, ITBP, सेना, पुलिस, वन विभाग की 150 जवानों की टीम दिन-रात जंगलों, खाइयों, गदेरों, झाड़ियों में छान रही है।
ड्रोन उड़ रहे हैं, खोजी कुत्ते 'बन्नी' और 'ब्राउन' सूंघ रहे हैं, हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वे हो रहा है।
DM ने 6 सदस्यीय 'डीप डाइव टीम' भी उतार दी - जो गहरी खाइयों और झीलों में देखेगी। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान NIM की टीम भी अब उतर रही है। पर 10 दिन बीत गए, बबीता का एक धागा तक नहीं मिला।
कौन थी बबीता पांडे?
रामनगर की चिल्किया की रहने वाली। घर में 2 भाइयों की इकलौती बहन। पढ़ाई में मेधावी, MBA कर रही थी, साथ में पार्ट-टाइम जॉब भी।
पिता गोपाल पांडे 5 साल पहले हादसे में दिव्यांग हो गए। बबीता ही घर का सहारा थी। दादी रो-रोकर कह रही - "मेरी पोती ढूंढ लाओ"। पिता की एक ही दुआ - "बेटी सकुशल घर लौट आए"।
4. सवाल जो सबको खा रहे हैं:
आधी रात को अकेले बाहर क्यों गई? गाने सुनने के लिए?
दोस्तों की जिम्मेदारी क्या थी? परिवार का आरोप है कि बबीता उनके साथ गई थी, तो सुरक्षा उन्हीं की थी। पुलिस ने दोनों दोस्तों पर अपहरण का केस दर्ज कर हिरासत में लिया है।
दयारा का पहाड़ निगल गया? क्या बबीता खाई में गिर गई? या जंगली जानवर? या कोई और साजिश? दयारा की चट्टानें, सीधे ढलान, अचानक मौसम - सब यहां चुनौती है।
पहाड़ कह रहा - 'बेटी, तू कहाँ है?'
SP कमलेश उपाध्याय खुद गोई कैंप में डेरा डाले हैं। DM प्रशांत आर्य हर दिन अपडेट ले रहे। पर जवाब एक ही - 'सुराग नहीं'।रामनगर के घर में फोन की घंटी का इंतजार है। दिव्यांग पिता, रोती दादी, दो भाई... सबकी आंखें दयारा की तरफ हैं।