
।।अच्छे लोगों के साथ सरकार का अन्याय।।
इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर यातायात जागरूकता के लिए चर्चित आरक्षक विवेकानंद तिवारी को सामान्य सेवा शर्तों के उल्लंघन एवं निजी लाभ अर्जित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
उनके फॉलोअर्स और प्रशंसकों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उनके प्रयासों को समाज ने सराहा। भले ही हर व्यक्ति उनके संदेशों का पालन करता हो या नहीं, लेकिन यह निश्चित है कि उन्होंने लाखों लोगों के ज्ञान और जागरूकता में वृद्धि की। इसी कारण उन्हें समय-समय पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया।
यदि उनके कार्य वास्तव में नियमों के विरुद्ध थे, तो यह प्रश्न भी उठता है कि प्रशासन इतने वर्षों तक मौन क्यों रहा? जब उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी, सम्मान मिल रहे थे और उनके वीडियो खुले मंचों पर उपलब्ध थे, तब किसी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई?
विवेकानंद तिवारी कम से कम उन आरक्षकों से तो बेहतर ही दिखाई देते हैं जो चौराहों पर तैनात होने के बावजूद दुकानों में बैठकर समय बिताते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा का ही परिणाम था कि लोग उन्हें देखते ही स्वयं यातायात नियमों का पालन करने और चौराहों पर व्यवस्थित होने का प्रयास करते थे।
नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए जिसने अपनी ड्यूटी को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनजागरूकता का माध्यम बनाया।
इस कार्यवाही का हम पूर्ण रूप से विरोध करते है
Vivekanand Tiwari #शहडोलिया 🙏🏼