
#पौड़ी_गुलदार_के_हमले_में_महिला_की_दर्दनाक_मृत्यु, देवराज क्षेत्र के वाड़ी गांव में दहशत का माहौल
#पौड़ी_गढ़वाल: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के देवार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वाड़ी गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ मंगलवार को एक खूंखार गुलदार ने दिनदहाड़े एक महिला को अपना निवाला बना लिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
#घटना_का_विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाड़ी गांव निवासी लगभग 55 वर्षीय महिला हर दिन की तरह अपने मवेशियों के लिए चारा (घास) लेने घर से कुछ ही दूरी पर स्थित खेतों की ओर गई थी। घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर पहले से घात लगाए बैठे गुलदार ने महिला पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया।
#प्रत्यक्षदर्शियों_और_स्थानीय_इनपुट के अनुसार, हमला इतना भीषण था कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला। गुलदार महिला को घसीटते हुए पास ही स्थित एक सुनसान खंडरनुमा मकान के भीतर ले गया!
#खोजबीन_और_बरामदगी
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी महिला घर वापस नहीं लौटी, तो परिजनों को चिंता हुई। अनहोनी की आशंका में ग्रामीणों ने एकजुट होकर खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान ग्रामीणों को गांव के ऊपरी छोर पर स्थित एक निर्जन मकान के पास महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। ग्रामीणों के शोर मचाने पर गुलदार शव को छोड़कर पास के घने जंगलों की ओर भाग निकला। घटना की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
#ग्रामीणों_में_रोष और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की सक्रियता बनी हुई है, जिसकी सूचना कई बार वन विभाग को दी गई थी। बावजूद इसके, विभाग द्वारा कोई ठोस सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों के अनुसार, "गुलदार ने शव को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया था, जिससे स्पष्ट है कि वह कितना आक्रामक हो चुका है।" गांव वालों ने अब वन विभाग से तत्काल प्रभाव से गुलदार को 'आदमखोर' घोषित कर उसे पकड़ने या ढेर करने की मांग की है।
#प्रशासनिक_कार्रवाई
सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। अधिकारियों ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को अकेले जंगलों की ओर न जाने और सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं, ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और क्षेत्र में वन विभाग की गश्त बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।